मंगलवार, 25 अक्तूबर 2016

अकिंचन



जीवन के इन उपालंभों को 
हृद्भास ले मैं चलता हूँ l
इस जीवन की तुरीय संध्या
जब आएगी, मैं फिर आऊँगा l
हे पिता तुम्हारे चुम्बन को
मैं मधुर गात ये संग लाऊँगा ll


उत्पल कान्त मिश्र “नादां”
मुंबई
अक्टूबर २५, २०१६ 


(पुत्र  अथर्व को समर्पित !!) 




(Pic: Ramya Rao)

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5 टिप्‍पणियां:

Deepti Agarwal ने कहा…

??

उत्पल कान्त मिश्रा "नादां" ने कहा…

Just for him. Stable as of now.

Deepti Agarwal ने कहा…

happy diwali to all of you

Ravindra Singh Yadav ने कहा…

मार्मिक शब्दावली.

App Development Company India ने कहा…

Nice post, things explained in details. Thank You.